23/09/2022
देश

पीएम नरेंद्र मोदी ने अखिल भारतीय शैक्षिक समागम का किया उद्धाटन बोले नई शिक्षा नीति मातृभाषा में पढ़ाई के रास्ते खोल रही

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एलटी कॉलेज से सिगरा स्थित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सम्मेलन केंद्र रुद्राक्ष पहुंच चुके हैं। यहां उन्होंने तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया। शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस समागम में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) सह आयोजक हैं। वो इस मौके पर नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के टिप्स देने के साथ ही इसकी उपयोगिता और खासियत भी बताएंगे। पीएम का संबोधन शुरू हो चुका है। इस दौरान समागम में राज्यपाल, सीएम योगी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, यूजीसी के चेयरमैन और देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपति मौजूद हैं।
बनारस की बेटियों का बनाया अंगवस्त्रम भेंट किया गया
केंद्रीय मंत्री ने पीएम का जरोदजी से निर्मित खास अंगवस्त्रम भेंट कर पीएम का अभिनंदन किया। पीएम मोदी रुद्राक्ष कनवेंशन सेंटर मंच पर मौजूद हैं। अखिल भारतीय शिक्षा समागम के बाद पीएम मोदी सिगरा स्टेडियम पहुंचेंगे। रुद्राक्ष पहुंचने से पहले सारी तैयारियां पूरी हो चुकी है। रुद्राक्ष कनवेंशन के अंदर जहां सारी कुर्सियां अथितियों से भर गई थी वहीं सिगरा सहित आसपास के इलाकों को पीएम मोदी के होर्डिंग और भाजपा के बैनर पोस्टर सजा दिया गया था।
पीएम देंगे टिप्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अखिल भारतीय शिक्षा समागम के उदघाटन के बाद राष्ट्र निर्माण पर अपने दृष्टिकोण को साझा करने के साथ भारत के अग्रणी उच्च शिक्षा संस्थानों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को लागू करने की सफल रणनीति से अवगत कराएंगे। पीएम इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल, आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, योगी आदित्यनाथ और कौशल विकास व शिक्षा के राज्य मंत्रियों की उपस्थिति में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के क्रियान्वयन पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। एनईपी मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ के कस्तूरीरंगन, विशेष सम्बोधन देंगे।
पीएम ने कहाअखिल भारतीय शिक्षा कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में बोले पीएम मोदी पीएम ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति अब मातृभाषा में पढ़ाई के रास्ते खोल रही है। इसी क्रम में, संस्कृत जैसी प्राचीन भारतीय भाषाओँ को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। नई शिक्षा नीति देश को नई दिशा देगी। शिक्षा और शोध का मंथन जरूरी है। नई पीढ़ी पर बड़ी जिम्मेदारी है। पीएम बोले देश में टैलेंट की कमी नहीं रही है, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसी शिक्षा नीति बनाई थी कि पढ़ाई का मतलब सिर्फ नौकरी पाना ही माना जाने लगा। इस तरह की शिक्षा नीति गुलामी के दौर में अंग्रेजों ने खुद की शासन व्यवस्था के तहत अपने लिए सेवक वर्ग तैयार करने को बनाई थी। देश को आगे बढ़ाने के लिए हम हर तरह के मानव संसाधन उपलब्ध कराएंगे। हमारे शिक्षक जितनी तेजी से इस भावना को आत्मसात करेंगे देश का उतना ही ज्यादा लाभ होगा। कहा देश जिन लक्ष्यों को पाने की कभी कल्पना भी नहीं करता था, मौजूदा भारत में वह सब संभव है। कोरोना जैसी महामारी से हम कितनी तेजी के साथ जल्दी से उबरे। आज हम दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप वाले हैं। हमारी अर्थव्यवस्था कितनी तेजी के साथ आगे बढ़ी।

देश की बेटियों को मिल रहा प्रोत्साहन
देश की बेटियों के लिए जो क्षेत्र पहले बंद हुआ करते थे वह सेक्टर आज उनकी प्रतिभा का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें अपने युवाओं को खुली उड़ान के लिए नई ऊर्जा से भरना होगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ हमारी जिम्मेदारी बढ़ी है। युवाओें का दायित्व बढ़ा है। हमें उनकी आकांक्षाओं को समझना होगा। नई शिक्षा नीति में पूरा फोकस बच्चों की प्रतिभा और च्वाइस के हिसाब से उन्हें स्किल्ड बनाने पर है। काशी को मोक्ष की नगरी इसलिए कहते हैं क्योंकि हमारे यहां मुक्ति का एकमात्र रास्ता ज्ञान को ही माना जाता है।
नई शिक्षा नीति में आधारभूत ढांचे पर हुआ है कामहमने हर पल इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जिंदा रखा है। मैं स्वयं इतने कम समय में कम से कम 25 सेमिनार में गया हूं और इसी विषय पर बोलता रहा हूं। कस्तूरीरंजन जी भी इस रिपोर्ट को देने के बाद लगातार लोगों से इस विषय पर संवाद कर रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए देश के एजुकेशन सेक्टर में एक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर overhaul पर भी काम हुआ है। आज देश में बड़ी संख्या में नए कॉलेज खुल रहे हैं, नए विश्वविद्यालय खुल रहे हैं, नए IIT और IIM की स्थापना हो रही है।

भविष्य के लिए ही व्यवस्थाएं भी विकसित करनी होंगीअब आप सबको वर्तमान को संभालना है, आपके पहले जो करके गए हैं उसको आगे बढ़ाना है। लेकिन आज जो काम कर रहे हैं, उनको भविष्य के लिए ही सोचना होगा, व्यवस्थाएं भी भविष्य के लिए ही विकसित करनी होंगी। 29 जुलाई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 2 साल पूरे होने वाले हैं। बड़े मंथन के बाद ये शिक्षा नीति बनाई गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का इतनी विविधताओं से भरे देश में स्वागत हो, ये अपने आप में बहुत बड़ी सिद्धि है।

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समागम में है इनकी उपस्थितिशिक्षा समागम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार विभिन्न भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों के अकादमिक, प्रशासनिक और संस्थागत प्रमुख, शिक्षाविद, शोधकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी, नीति निर्माता, विचारक, प्रोफेशनल्स और शैक्षिक तथा उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

इन मुद्दों पर होनी है चर्चातीन दिनों के दौरान बहु-विषयक और समग्र शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार, भारतीय ज्ञान प्रणाली, शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण, डिजिटल सशक्तिकरण और ऑनलाइन शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता, गुणवत्ता, रैंकिंग और प्रत्यायन, समान और समावेशी शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षकों का क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे। एनईपी 2020 के सफल क्रियान्वन से उत्पन्न अपने अनुभव और सफलताओं को भी साझा किया जाएगा। एनईपी 2020 के क्रियान्वयन की विभिन्न पहलों तथा क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी पुस्तकों पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।

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