08/02/2023
अपराध देश धार्मिक

सुप्रीम कोर्ट ने गोधरा के दोषी को जमानत दी: CJI की बेंच बोली- उसने ट्रेन पर पत्थर फेंके थे, 17 साल जेल में रहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गोधरा कांड के एक दोषी फारूक को जमानत दे दी। उम्रकैद की सजा के खिलाफ दोषी की अपील 2018 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि फारूक 2004 से जेल में है। वो पिछले 17 साल जेल में रह चुका है। इसलिए उसे जमानत दी जाए।

जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह सबसे जघन्य अपराध में से एक था। लोगों को बोगी में बंद करके जिंदा जलाया गया था। सामान्य परिस्थितियों में पत्थरबाजी कम गंभीर अपराध हो सकता है, लेकिन यह अलग है।”

पहले जाने क्या था मामला
27 फरवरी 2002 को गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के एक कोच में भीड़ ने आग लगा दी गई थी। इस घटना में 59 कारसेवकों की जलकर मौत हो गई थी। इसी के बाद गुजरात में 2002 के दंगे हुए थे। दोषी फारूक पर पत्थरबाजी और हत्या करने का मामला साबित हुआ था। इसके बाद उसे उमक्रैद की सजा सुनाई गई थी।

दरअसल, गोधरा कांड के बाद चले मुकदमों में करीब 9 साल बाद 31 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 2011 में SIT कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी और 20 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बाद में अक्टूबर 2017 में गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की फांसी की सजा को भी उम्रकैद में बदल दिया था। दोषी फारूक इन्हीं में से एक है।

इससे पहले 13 मई 2022 को एक और दोषी अब्दुल रहमान धंतिया कंकट्टो जम्बुरो को 6 महीने की जमानत दी गई थी। रहमान की पत्नी को टर्मिनल कैंसर है और उसकी बेटियां मानसिक बीमार हैं। 11 नवंबर को उसकी जमानत 31 मार्च, 2023 तक बढ़ा दी गई।

अब पढ़ें आज की सुनवाई में क्या हुआ
सरकार का पक्ष रखते हुऐ SG ने कहा- मामला फाइनल हियरिंग के लिए तैयार है। अब समयबद्ध सुनवाई के लिए भी विशेष बेंच हैं। इसे भी लिस्टेड किया जा सकता है। इस पर CJI ने कहा- मिस्टर SG, आप यह कर सकते हैं। अपने जूनियर्स से एक विवरण तैयार करने के लिए कहें और इसे रजिस्ट्रार पुनीत सहगल को भेज दें। मैं इसे जरूर देखूंगा।”

बेंच ने कहा था कि पहले जमानत याचिकाओं सुनेंगे

इससे पहले 2 दिसंबर को 2002 के गोधरा ट्रेन जलाने के मामले में सुनवाई हुई थी। जिसमें CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने गुजरात सरकार से जानकारी मांगी थी कि इस कांड में किस आरोपी की क्या भूमिका थी। दोषी फारुक की जमानत याचिका भी बेंच के पास पहुंची थी।

जब SG ने सुनवाई को जनवरी तक के लिए स्थगित करने की मांग की, तब फारुक के वकील ने बेंच से कहा कि इसे विंटर वेकेशन के पहले सुना जाए, क्योंकि राज्य दूसरी बार स्थगन की मांग कर रहा है।सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा, “अगर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होती है, तो सब कुछ सुलझाया जा सकता है।” लेकिन बेंच ने कहा था कि वह सबसे पहले जमानत याचिकाओं पर विचार करेगी।

गोधरा कांड में 59 की मौत, उसके बाद भड़के दंगों में हजार की जान गई
2002 में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर एक दुखद घटना हुई थी। अहमदाबाद जाने के लिए साबरमती एक्सप्रेस गोधरा स्टेशन से चली ही थी कि किसी ने चेन खींचकर गाड़ी रोक ली और फिर पथराव किया। बाद में ट्रेन के S-6 डिब्बे में आग लगा दी गई। ट्रेन में अयोध्या से लौट रहे 59 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी।

गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में एक हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू थे। गोधरा कांड के एक दिन बाद 28 फरवरी को अहमदाबाद की गुलबर्ग हाउसिंग सोसायटी में बेकाबू भीड़ ने 69 लोगों की हत्या कर दी थी। इन दंगों से राज्य में हालात इस कदर बिगड़ गए कि स्थिति काबू में करने के लिए तीसरे दिन सेना उतारनी पड़ी।

 

Related posts

आफताब का होगा पॉलीग्राफी टेस्ट, कोर्ट से मिली परमिशन: श्रद्धा मर्डर केस

Such Tak

सुशांत सिंह राजपूत की मनोचिकित्सक का खुलासा, बताया इतने बुरे दौरान से गुजर रहे थे दिवंगत अभिनेता

Web1Tech Team

महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंची, अयोग्य ठहराने के नोटिस पर शिंदे गुट की याचिका पर आज सुनवाई

Such Tak