01/12/2022
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कोविड के कारण 7.1 करोड़ लोगों को गरीबी ने घेरा, वर्ल्ड बैंक ने कहा-1/3 गरीब भारत में बढ़े

 

विश्व बैंक के मुताबिक, 2020 में वैश्विक स्तर पर गरीबों की संख्या में 7.1 करोड़ की वृद्धि हुई है, जिनमें कम से कम 33% अकेले भारत में थे. भारत में सरकारी आंकड़ों के अभाव में गरीबी का अनुमान लगाने के लिए अन्य तरीकों का इस्तेमाल किया गया.

विश्व बैंक की एक नई रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 महामारी ने विश्व स्तर पर और भारत के भीतर गरीबों की संख्या में गिरावट की स्थिति को उलटकर रख दिया है. और 2020 में भारत में गरीबों की संख्या 2.3 करोड़ से 5.6 करोड़ के बीच बढ़ी है, जो कि इसका अनुमान लगाने की अलग-अलग पद्धति पर निर्भर करता है.

दुनियाभर में गरीबों की संख्या 7.1 करोड़ बढ़ी है, जिनमें 33 से 80 फीसदी भारत में

वैश्विक स्तर पर गरीबी में वृद्धि 1998 के बाद पहली बार हुई है, जबकि भारत में यह वृद्धि 2011 के बाद पहली बार हुई है. विश्व बैंक की ‘पॉवर्टी एंड शेयर्ड प्रॉस्पैरिटी 2022’ रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक अत्यधिक गरीबी (यानी 2.15 डॉलर या 177 रुपये प्रतिदिन से कम पर जीवनयापन करने वाले लोगों की संख्या) 2019 में 8.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में अनुमानत: 9.3 प्रतिशत हो गई. दूसरे शब्दों में कहें तो दुनियाभर में गरीबों की संख्या 7.1 करोड़ बढ़ी है, जिनमें 33 से 80 फीसदी भारत में थे.

 

 

 

 

 

 

 

वजह यह है कि भारत सरकार ने अभी अपने 2020 के गरीबी अनुमानों को अंतिम रूप नहीं दिया है, और इसलिए यहां गरीबी के अनुमान के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ा है.

सरकारी आंकड़े उपलब्ध न होने के कारण रिपोर्ट सीएमआईई डेटा पर निर्भर

भारत के नेशनल एकाउंट्स का इस्तेमाल कर लगाए गए एक अनुमान में मुताबिक 2020 में देश के 2.3 करोड़ अतिरिक्त लोग गरीबी की चपेट में आए, जबकि निजी डेटा कंपनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की तरफ से किए जाने वाले कंज्यूमर पिरामिड हाउसहोल्ड सर्वे (सीपीएचएस) के आधार पर यह संख्या 5.6 करोड़ होने का अनुमान है. विश्व बैंक ने अपनी गणना में सीपीएचएस को आधार बनाया है.

पहले घट रही थी गरीबी…

विश्व बैंक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘आंकड़े बताते हैं कि 2011 के बाद भारत में गरीबी में कमी आई थी, जो काफी हद तक ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी घटने का नतीजा रही है.’ हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि भले ही उस अवधि के दौरान समग्र गरीबी में गिरावट आई, लेकिन यह वैश्विक गरीबी माप के लिए पहले के अनुमानों से कम है.

2017 में विश्व बैंक की तरफ से इस्तेमाल नवीनतम अनुमान से पता चलता है कि उस वर्ष 13.6 प्रतिशत लोग प्रतिदिन 1.90 डॉलर (156.34 रुपये) से कम पर जीवन यापन कर रहे थे.

2019 के बाद रिपोर्ट में प्रतिदिन 2.15 डॉलर (177 रुपये) प्रतिदिन की एक बढ़ी गरीबी रेखा को अपनाया गया, जिसके आधार पर 2019-20 में भारत में राष्ट्रीय गरीबी का आंकड़ा 10 प्रतिशत था. इसके मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी दर 12 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 6 प्रतिशत थी.

इसमें आगे कहा गया है, ‘2022 तक कम से कम 66.7 करोड़ लोगों के अत्यधिक गरीबी में होने का अनुमान है. यह कोविड-19 और यूक्रेन पर रूसी हमले के प्रभाव के बिना लगाए गए पूर्वानुमान की तुलना में 7.0 करोड़ अधिक है. सबसे खराब स्थिति में 68.5 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी में होंगे जो आंकड़ा अन्य स्थितियों के बिना लगाए गए अनुमान से 89 करोड़ अधिक है.’

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