08/02/2023
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पाकिस्तान से भी मोर्चा खोल सकता है चीन: सेना और विदेश नीति में 80% हावी, भारत के लिए है खतरे की बात

चीन तेजी से पूरी दुनिया में अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है, ये तो सभी को पता था, लेकिन किस देश में चीन का कितना प्रभाव है, अब ये भी सामने आ गया है। अलग-अलग देशों में चीन के प्रभाव को मापने के लिए 82 देशों के चीन इंडेक्स में पाकिस्तान ने टॉप किया है। यानी चीन का सबसे ज्यादा प्रभाव पाकिस्तान पर है।

हम जानेंगे कि इस लिस्ट में और कौन से देश हैं, पाकिस्तान के किन सेक्टर्स में चीन का कितना प्रभाव है, और ये लिस्ट भारत के लिए चिंता की बात क्यों है?

चीन इंडेक्स क्या है, जिसमें पाक ने टॉप किया?

ताइवान के रिसर्च आर्गेनाइजेशन डबल थिंक्स लैब्स ने 82 देशों पर चीन के प्रभाव का डेटाबेस तैयार किया। यही चीन इंडेक्स 2022 है। ये अपनी तरह की पहली स्टडी है।

चीन इंडेक्स में अलग-अलग देशों को रैंकिंग दी गई है। सबसे ज्यादा चीनी प्रभाव वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान टॉप पर है। इस स्टडी के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का कंट्रोल सबसे ज्यादा है। यूरोपीय देश जर्मनी 19वें और अमेरिका 21वें नंबर पर है।

पाकिस्तान को कैसे कंट्रोल करता है चीन?

  • अपने घरेलू बाजार के लिए पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और मोबाइल फोन चीन से निर्यात करता है। इसके अलावा पाकिस्तान के डिफेंस सेक्टर ने चीन की मदद से आधुनिक टेक्नोलॉजी के हथियार हासिल किए हैं। 2007 से 2015 तक चीन और पाकिस्तान के बीच ट्रेड में 278% का इजाफा हुआ है।
  • पाकिस्तानी सेना के लिए हथियार, मिसाइलें, तोप, फाइटर जेट्स और टैंक के प्रोडक्शन और इम्पोर्ट में चीन मदद करता है। पाकिस्तानी सेना को समय-समय पर चीन की तरफ से ट्रेनिंग भी मिलती है।
  • पाकिस्तान को कमजोर अर्थव्यवस्था से निपटने के लिए चीन ने IMF और वर्ल्ड बैंक का लोन चुकाने में भी मदद की है। संयुक्त राष्ट्र सिक्योरिटी काउंसिल में भी चीन ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दिलाई और FATF की सूची में ब्लैकलिस्ट किए जाने से भी चीन ने पाकिस्तान को बचाने में मदद की है।
  • 2020 तक पाकिस्तान के रेलवे, एयरपोर्ट और एनर्जी सेक्टर में चीन ने करीब 5 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट किया है। इसमें सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर। इस प्रोजेक्ट से पाकिस्तान में 15 सालों में करीब 2.5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के पूरा होने तक पाकिस्तान की एनुअल इकोनॉमिक ग्रोथ रेट भी 2.5% की दर से बढ़ेगी।
  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर का मकसद पाकिस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसमें करांची, जकोबाबाद, मुल्तान, पेशावर और खुन्ज्रेब पास को जोड़ने वाली मुख्य रेल लाइन्स बनाई जाएंगी। करांची-पेशावर लाइन पर करीब 66 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • 2.7 लाख करोड़ रुपए का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट चीन ने पाकिस्तान के एनर्जी सेक्टर में किया है। 2030 तक ये प्रोजेक्ट्स पाकिस्तान के लिए 75% बिजली की जरूरत पूरी करेंगे।

चीन के पाकिस्तान में इन्वेस्ट करने की तीन बड़ी वजहें हैं…

पहली वजहः चीन अपनी 80% ऑयल सप्लाई की जरूरत हिंद महासागर के मलाका स्ट्रेट से इम्पोर्ट करता है। इसकी दूरी करीब 10,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। अगर पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से ये इम्पोर्ट पूरा किया जा सके तो ये दूरी महज 3000 किलोमीटर हो जाएगी। इस तरह अगर चीन अपना आधा तेल भी पाकिस्तान के रास्ते से लेकर जाए तो चीन को करीब 16 हजार करोड़ रुपए का फायदा होगा।

दूसरी वजहः मलाका स्ट्रेट पर अक्सर जंग का डर बना रहता है क्योंकि ये रास्ता कभी भी चीन के लिए बंद हो सकता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने जापान, साउथ कोरिया, फिलीपीन्स, थाइलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी एयर फोर्स और नेवी के लिए बेस सेट अप किए हैं। इन देशों में बड़ी संख्या में अमेरिकी आर्मी फाइटर एयरक्राफ्ट और नेवल एयरक्राफ्ट के साथ तैनात हैं।

तीसरी वजहः चीन के वेस्टर्न फ्रंटियर पर रोड नेटवर्क और इंडस्ट्रीज सेटअप करना। लेकिन, इन इंडस्ट्रीज के प्रोडक्ट्स को एक्सपोर्ट करने के लिए चीन को वेस्टर्न फ्रंटियर पर भी रास्ते खोलने की जरूरत है। इसके लिए चीन ने कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान के जरिए ईरान और तुर्की से यूरोप तक अपने लिए मॉडर्न सिल्क रूट तैयार किया है। इसके साथ चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भी बनाया जा रहा है।

फॉरेन एक्सपर्ट और जेएनयू में इंटरनेशनल स्टडीज के डीन डॉ. राजन कुमार के मुताबिक चीन का पाकिस्तान में इंटरेस्ट होने की एक बड़ी वजह है भारत को कंट्रोल करना। चीन भारत से डायरेक्ट संघर्ष नहीं चाहता है। इस वजह से पाकिस्तान में इन्वेस्टमेंट बढ़ा रहा है।

इसके अलावा पाकिस्तान के रास्ते चीन गल्फ देशों तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है। गल्फ देशों से ऑयल इम्पोर्ट के लिए चीन को हिंद महासगार का कोई विकल्प बनाना चाहता है। इस वजह से चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के रूप में आल्टरनेट रूट डेवलप किया है।

 

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