08/02/2023
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लेपिड के बयान पर बवाल, अनुपम खेर भड़के, विवेक अग्निहोत्री का तंज, इजरायली राजदूत ने की निंदा

द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म अपनी रिलीज के समय से ही विवादों में है। कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी फिल्म द कश्मीर फाइल्स मार्च में जब रिलीज हुई तो बीजेपी शासित तमाम राज्य उसे अपने-अपने ढंग से प्रमोट करने में जुट गए थे। लेकिन अधिकतर फ़िल्म समीक्षकों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे प्रोपेगेंडा फ़िल्म बताया। इन आरोपों-प्रत्यारोपों पर एक समय ख़ूब हंगामा हुआ था। फिर यह विवाद धीरे-धीरे गायब हो गया। लेकिन सोमवार को एक बार फिर से यह विवाद तब खड़ा हो गया जब 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव यानी आईएफएफआई के समापन समारोह में महोत्सव के जूरी प्रमुख नादव लापिड ने कह दिया कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म फेस्टिवल की स्पर्धा में शामिल भी किए जाने लायक नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 15 फ़िल्में देखीं। उनमें से 14 में सिनेमाई गुण थे, चूक थी और इन पर चर्चाएँ हुईं। 15वीं फिल्म द कश्मीर फाइल्स से हम सभी परेशान और हैरान थे। यह एक प्रोपेगेंडा, भद्दी फिल्म की तरह लगी, जो इस तरह के प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के कलात्मक प्रतिस्पर्धी वर्ग के लिए अनुपयुक्त है।’ तो सवाल है कि आख़िर इस फ़िल्म में ऐसा क्या है कि जूरी प्रमुख को यह कहना पड़ा?

फिल्म 1990 के दौर के उस भयावह समय पर केन्द्रित है, जब आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्याएं कीं और उन्हें कश्मीर छोड़ने पर मजबूर किया गया। हजारों कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहने पर मजबूर हो गए।

इजराइल के राजदूत ने भी शर्मनाक बताया

भारत, श्रीलंका और भूटान में इजराइल के राजदूत नोर गिलोन ने लापिड के बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि तुम्हें (नदव लापिड को) शर्म आनी चाहिए. उन्होंने कहा “भारतीय संस्कृति में कहा जाता है कि अतिथि भगवान के समान होता है. आपने जजों के पैनल की अध्यक्षता करने के भारतीय निमंत्रण का सबसे खराब तरीके से दुरुपयोग किया है.” उन्होंने कहा कि “मैं इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा करता हूं. इस बयान का कोई औचित्य नहीं है. ये यहां कश्मीर मुद्दे की संवेदनशीलता को दर्शाता है.” गिलोन ने कहा एक इंसान के रूप में मुझे शर्म आ रही है. हम अपने मेजबानों से इस बुरे तरीके के लिए माफी मांगना चाहते हैं.

हमारे जख्मों पर नमक छिड़का- अशोक पंडित

भारतीय फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने कहा कि IFFI के जूरी प्रमुख के रूप में नावद लापिड का चयन सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक बड़ी चूक है…फिलिस्तीन के हमदर्द से कोई क्या उम्मीद कर सकता है?

“मैं एक कश्मीरी पंडित के रूप में और जो नरसंहार का शिकार है, हमारी त्रासदी के चित्रण को अश्लील बताने वाले IFFI 2022 के जूरी प्रमुख नदव लैपिड के खिलाफ एक गंभीर कार्रवाई की मांग करता हूं. उन्होंने हमारे जख्मों पर नमक छिड़का है और इसलिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.”

मिडवेस्ट इंडिया के लिए इजराइल के महावाणिज्यदूत कोब्बी शोशान ने कहा कि मैंने कश्मीर फाइल देखी और कलाकारों से मिला हूं. फिल्म के बारे में मेरी नदव लापिड से अलग राय है. उनके बयान के बाद मैंने नदव को अपनी राय बताई है. इसपर भारतीय टीवी एक्टर सुमंत रमन ने ट्वीट करते हुए इसे डैमैज कंट्रोल की कोशिश बताया है.

इस पूरे विवाद पर कश्नीर फाइल्स के निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने भी इशारों-इशारों में तंज कसा है. उन्होंने कहा कि “सत्य सबसे खतरनाक चीज है. यह लोगों को झूठा बना सकता है.”

नदव लापिड ने क्या कहा था?

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के ज्यूरी प्रमुख नदव लापिड ने कहा था कि “द कश्मीर फाइल्स फिल्म से हम सभी परेशान और हैरान थे. यह हमें एक प्रचार, अश्लील फिल्म की तरह लगा, जो इस तरह के एक प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के एक कलात्मक, प्रतिस्पर्धी वर्ग के लिए अनुपयुक्त है.”

दरअसल, भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) को भारत सरकार आयोजित करती है. इस बार के IFFI समारोह में जूरी प्रमुख इजराइली फिल्म निर्माता नदव लापिड थे. लापिड ने कश्मीर फाइल्स पर ये बात समारोह के समापन कार्यक्रम में कही, जब भारत सरकार में मंत्री भी वहां मौजूद थे.

बीजेपी समर्थक तो इस फ़िल्म की आलोचना करने वालों को ‘देशद्रोही’ क़रार दे रहे थे। सिनेमा हॉलों में इस फ़िल्म के प्रदर्शन के दौरान कई जगहों से नफ़रती नारे, भाषण और हंगामे की ख़बरें भी आई थीं।

अनुपम खेर की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म 2022 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में से एक है।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘वे नफरत से लोगों के दिलों को और भरना चाहते हैं। वे कह रहे हैं कि हर पुलिसकर्मी और सैनिक… सभी को यह फिल्म देखनी चाहिए ताकि वे हमसे आखिरी हद तक नफ़रत करें, जैसा कि हिटलर और गोएबल्स ने जर्मनी में किया था। तब 60 लाख यहूदियों को क़ीमत चुकानी पड़ी थी। भारत में कितनों को क़ीमत चुकानी पड़ेगी, मुझे नहीं पता।’
प्रोपेगेंडा फैलाया गया: पवार

एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि बीजेपी द कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर जहरीला माहौल बना रही है। पवार ने कहा था कि बीजेपी कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर फर्जी प्रोपेगेंडा फैला रही है। पवार ने कहा था कि इस तरह की फिल्म को स्क्रीनिंग के लिए मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी लेकिन इसे टैक्स में छूट भी दी जा रही है।

आलोचकों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘वे गुस्से में हैं क्योंकि हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म उस सच्चाई को सामने ला रही है जिसे जानबूझकर छिपाया गया था। पूरी जमात जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा फहराया था, 5-6 दिनों से उग्र है। तथ्यों और कला के आधार पर फिल्म की समीक्षा करने के बजाय, इसे बदनाम करने की साज़िश की जा रही है।’

 

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