23/09/2022
राजस्थान

क्या मतदाता कोई जानबर है कि किसी भी खूंटी से बांध दिए जाएं और ज़ब चाहा ले चले घुमाने.


भाईयो और बहनों जो अबतक नहीं हुआ, कुछ ऐसा करने की चाह है, पंचायत चुनाव हैं.मगर नेताओं ने बंटवारे की ऐसी रणनीति रची है कि कोई इस जहर से बच नहीं सकता.पूरे प्रदेश में काबलियत नहीं, जाती या समुदाय देखकर वोट निर्धारित किए गए हैं।  हर 5 साल बाद प्रधान की सीट आरक्षण से बदल जाती है, पर विधायक की सीट पर यही, आरक्षण हावी क्यों नहीं होता… कभी सोचा है क्या.अगर जातिगत आरक्षण इतना ही जरूरी है तो हर 5 वर्ष बाद विधायक और सांसद की सीट पर भी लागू क्यों नहीं कर दिया जाता .. क्योंकि लड़ाना और कमजोर करना तो निचले हिस्से को होता है.
शिमला और दिल्ली के हुक्मरान आपकी मानवता को विभाजित करके ही सत्ता की सीढियाँ चढ़ते आए हैं ,मगर ये रोकना ..आपके हाथ है… क्योंकि मतदान कोई मंदिर का प्रसाद भर नहीं है कि ग्रहण कर लिया या बांट दिया.. यह जिंदगी के अनमोल पलों के 5 वर्ष हैं.. यूं ही कैसे लुटा दिए जाएं..

मैं बिलासपुर जिला की पटेर पंचायत से हूं.. प्रधान पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है.. हमे किसी से कोई आपत्ति नहीं है.. मगर हम सिर्फ यह जांचना चाहते हैं कि, जो 5 वर्षों के लिए हमारी मुखिया बनने जा रही है.. क्या वह इतनी काबलियत रखती भी है या नहीं.. क्या वह इस जज जिम्मेदारी को निभा पाएगी, या इसीलिये वोट दिए जाएं कि वह किसकी पत्नी, किसकी बेटी या किसकी बहू है। अगर नहीं रखती तो चुनाव आयोग को को पुनर्विचार करने पर मजबूर किया जाएगा। कि आयोग की गलतियों की सजा जनता क्यों भुगते…?

हम सभी उम्मीदवारों को एक मंच प्रदान करना चाहते हैं, जिसके माध्यम से वह अपना नजरिया, जनता से सांझा कर सके, और जनता बेहतर तरीके से अपने उम्मीदवारों को जांच परख सके.

किसी भी राजनीतिक दल के बहकावे में हम अपनी ग्रामीण परंपरागत प्रणाली का गला घोंट नहीं सकते। हमें किसी भी राजनीतिक दल विशेष का व्यक्ति समझकर नहीं वल्की शिक्षित और कार्य कुशल प्रतिनिधि को चुनना है.. यह हक है आपका कि आप उसे परख सकें। और यह कर्तव्य है उनका कि वह अपने को परखने का मौका दें..

1जनवरी 2020 को पटेर पंचायत परांगण में  हम अपने प्रधान और सहप्रधान पद के सभी उम्मीदवारों से इस मंच के माध्यम से विचार विमर्श कर रहे हैं.. जिसमे काबलियत होगी बह सबके सामने अपनी काबलियत से सबको प्रभावित करेगा.. आपसे विनती है कि पार्टियों के मकड़जाल से निकलकर.. अपना नुमाइंदा चुनें.. अपना रिमोट नहीं..
यह कार्यक्रम पूरे हिमाचल के लिए एक मार्गदर्शक होगा.  इसलिए 1 जनवरी को.. पटेर में जरूर पहुंचे..
क्योंकि राजनीतिक लोगों को समझ लेना होगा कि मतदाता कर कोई बकरी नहीं, जिसे जब दिल करे.. उस खूंटी से बांध दिया जाए.

सवाल उठता है हम किसी को बिना जांचे परखे वोट क्यों दें.. वोट है कोई  खैरात तो नहीं यह सिर्फ पंचायत ही नहीं, विधानसभा, लोकसभा और हर चुनाव में मंथन करने योग्य है।

जिस उम्मीदवार में कर काबिलियत होगी.. बह सवालों का सामना जरूर करेगा..
जिसे खुद की काबलियत पर भरोसा नहीं होगा , बो स्वयं को आनाकानी या वहाने की आढ में छुपाने की कोशिश करेगा और सवालों से भाग जाएगा।

उम्मीदवारों के लिए भी यह बेहतरीन विकल्प है कि उन्हें जनता से घर घर जाकर वोट नहीं मांगने पड़ेंगे, एक ही मंच पर लगभग पूरी पंचायत के लोग एकत्र मिल जाएंगे।

जिन लोगों ने पंचायत चुनावों को महज 5 सालों के लिए आमदनी का जरिया मान लिया था, वह सावधान जरूर हो जाएं, क्योंकि आज का मतदाता न मौन है न अशिक्षित…मतदाता कोई भेड़ बकरी नहीं जो 5 वर्षों तक किसी मजबूरी, या बिना जानकारी के बने नेताओं के आगे पिसते रहें..

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