01/12/2022
राजनीति राजस्थान

राजस्थान में नया सीएम आएगा या नहीं, जल्द बजट का ऐलान कर गहलोत ने दिए बड़े संकेत

कांग्रेस में 25 सितंबर को चले सियासी ड्रामे के बाद बदले समीकरणों के बीच, एक हफ्ते से राजस्थान  के मुख्यमंत्री  को लेकर फैसला लटका हुआ है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में ऐलान किया था कि राजस्थान की कमान किसके पास होगी ये सोनिया गांधी तय करेंगी. इसके बाद कांग्रेस महासचिव का भी बयान आया था कि एक बार फिर से विधायक दल की बैठक बुलाने के बाद सोनिया गांधी इसपर फैसला करेंगी.

फैसले की घड़ी अभी अपने समय पर नहीं पहुंची है, लेकिन राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की खींचतान जारी है. गहलोत एक बार फिर से पूरी तरह राजकाज में जुट गए हैं.

बजट जल्दी लाने की तैयारी में गहलोत

गहलोत ने 4 अक्टूबर को कहा कि राजस्थान का इस साल का बजट जल्दी आ सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार चाहेगी कि बजट में कोई देरी न हो क्योंकि पार्टियों को बजट के बाद चुनाव में जाना है. वैसे भी फरवरी-मार्च में बजट आते भी हैं, कोई 15 दिन पहले आ जाए, एक महीना पहले आ जाए, तो अलग बात है, पर वो मैं समझता हूं कि इसमें कोई देरी नहीं होगी, क्योंकि बाद में सबको चुनाव में जाना पड़ता है. गहलोत ने कहा कि

राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. हालांकि ये चुनाव दिसंबर में होंगे, लेकिन इसकी आचार संहिता नवंबर से पहले लग जाती है. साथ ही पार्टियां छह महीने पहले ही चुनावी मूड में चली जाती हैं. सबसे खास बात ये कि चुनावी साल में बजट घोषणाओं को आम जनता गंभीरता से नहीं लेती. उसे चुनावी झुनझुना मान लिया जाता है. ऐसे में जल्द बजट पेश करने की गहलोत की रणनीति अच्छा चुनावी दांव हो सकती है.

खाचरियावास से मिले पायलट

अब पायलट की राजनीतिक चालों की बात की जाए तो वे आजकल उन नेताओं की मिराजपुर्सी में दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने 25 सितंबर को विधायक दल की अहम बैठक से पहले उनके खिलाफ बिगुल फूंका था. पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने सोमवार की रात खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के सिविल लाइंस स्थित आवास पर मुलाकात की.

खाचरियावास 25 सितंबर को कांग्रेस के राजनीतिक सियासी घटनाक्रम में गहलोत खेमे की तरफ से अहम भूमिका निभाने वाले विधायक थे. खाचरियावास ने सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने पर तीखे प्रहार भी किए थे. राज्य में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. राज्य में जुलाई 2020 में राजनीतिक संकट के दौरान अशोक गहलोत खेमे में गये खाचरियावास ने मंगलवार को कहा कि पायलट के साथ बातचीत कोई नई बात नहीं थी. हालांकि उन्होंने दोनों के बीच हुई बातचीत के बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

खाचरियावास का दिल पायलट के साथ – राजेंद्र गुढ़ा

दूसरी ओर राज्य मंत्री राजेंद्र गुढ़ा पायलट के आवास पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि खाचरियावास का दिल पायलट के साथ है. पायलट के निवास पर पत्रकारों से बातचीत में गुढ़ा ने कहा कि मैं प्रताप सिंह खाचरियावास को लंबे समय से जानता हूं, वह मिलनसार व्यक्ति हैं, उनका दिल पायलट के साथ है. गुढ़ा का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वह लोगों से यह कहते हुए दिख रहे हैं कि पायलट की छवि खराब करने की साजिश रची गई थी. उन्होंने पायलट के धैर्य की प्रशंसा करते हुए उनकी तुलना महाभारत के अभिमन्यु से कर दी. गहलोत के करीबी माने जाने वाले गुढ़ा ने हाल ही में सचिन पायलट के समर्थन में बयान दिया है.

2 खेमों में बंट गए थे विधायक

राज्य में राजनीतिक संकट 25 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित करने के पार्टी के कदम के साथ सामने आया है. इसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव से पहले मुख्यमंत्री को बदलने की कवायद के रूप में देखा गया. हालांकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक सम्पन्न नहीं हो सकी क्योंकि अशोक गहलोत के वफादार माने जाने वाले विधायकों ने मंत्री शांति धारीवाल के घर समानांतर बैठक की और पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के किसी भी

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