30/05/2023
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हाईकमान की चेतावनी के बावजूद पायलट का अनशन आज ,पार्टी कर सकती है अनुशासनात्मक कार्रवाई

विपक्ष में रहते हुए वसुंधरा सरकार के खिलाफ जांच कराने के वादे को पूरा नहीं करने को मुद्दा बनाकर पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट अपनी ही सरकार के खिलाफ हमलावर हो गए हैं।

उन्होंने एक तरह से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर वसुंधरा राजे के साथ मिलीभगत के आरोप लगाकर कांग्रेस में सनसनी फैला दी है। खुद की सरकार के खिलाफ आक्रामक हुए सचिन पायलट मंगलवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठने जा रहे हैं।

पायलट के इस कदम को कांग्रेस हाईकमान ने गंभीरता से लिया है। प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर रंधावा मंगलवार को जयपुर आ रहे हैं। रंधावा ने कहा है कि पायलट को इस तरह से प्रेस कांफ्रेंस करके सरकार के खिलाफ स्टैंड नहीं लेना चाहिए था।

सीएम तो पार्टी ने मुझे भी नहीं बनाया था, क्या इसके लिए पार्टी थोड़े छोड़ी जा सकती है? वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मानेसर की घटना को याद कराते हुए पायलट पर तंज कसा है कि चुनी हुई सरकार गिराने के मामले में भी जांच करवाई जा रही है।

जयराम रमेश ने अनशन की घोषणा के तुरंत बाद लेटर जारी कर कहा कि राजस्थान में गहलोत सरकार ने कई बड़ी घोषणाएं लागू की हैं। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर हम लोगों के बीच जाकर सेवा के लिए जनादेश मांगेंगे।

पायलट के पीछे किसका सपोर्ट यह बड़ा सवाल

सचिन पायलट भी अपनी प्रेस कांफ्रेंस में यह साफ कर चुके हैं कि वह दो बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लेटर लिख चुके हैं। जो 28 मार्च और 2 नवंबर 2022 को सीएम को भेजे गए। रंधावा ने सीएम से भी वो लेटर लिए हैं और उनकी जानकारी में आ चुके हैं। उसके बावजूद भ्रष्टाचार के मामलों पर अब तक कोई कार्रवाई या जांच नहीं हुई, यह पायलट की पीड़ा है।

कांग्रेस आलाकमान को सचिन पायलट अपने सुझाव दे चुके हैं, उन सुझावों में भी यह मुद्दा शामिल था। संभव है कि सुखविंदर सिंह रंधावा नए प्रभारी आए हैं, इसलिए पायलट ने इस मुद्दे पर उनसे चर्चा नहीं की हो, क्योंकि पायलट का डायलॉग राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी और कांग्रेस हाईकमान से सीधे रहा है। पूर्व प्रभारी अजय माकन की जानकारी में सब बातें थीं। जब कांग्रेस आलाकमान ने सुलह करवाई थी, तब पायलट को कुछ आश्वासन भी दिए गए थे, जिनके पूरा होने का वो आज भी इंतज़ार कर रहे हैं।

आर-पार की लड़ाई के मूड में पायलट 
शायद पायलट को अनशन की घोषणा इसीलिए करनी पड़ी है, क्योंकि अब विधानसभा चुनाव में 6-7 महीने का ही समय बचा है और उनके उठाए मुद्दों पर कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि सचिन पायलट ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। वह चाहते हैं कि चुनाव से पहले खुद को प्रदेश में मजबूती से जनता के बीच स्टेबलिश किया जाए। मुद्दों के आधार पर गहलोत को घेरने की भी यह रणनीति है। बहरहाल आगे होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई से सचिन पायलट भी अच्छी तरह वाकिफ होंगे, सोच समझकर ही उन्होंने यह डिसीजन लिया है, लेकिन सचिन पायलट के इस चुनावी स्टेप के पीछे किसका सपोर्ट है, यह बड़ा सवाल है।

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