01/04/2023
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यूक्रेन-अमेरिका की जुगलबंदी के सामने क्या नरम पड़ रहे हैं पुतिन के तेवर ? ज़ेलेंस्की बाइडन से मिलने कैसे पहुंचे ?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस यूक्रेन के साथ जारी जंग ख़त्म करना चाहता है और ये धीरे-धीरे कूटनीतिक बातचीत से ही हो सकता है.

पुतिन का ये बयान ऐसे वक्त आया है जब एक दिन पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि वह युद्ध में यूक्रेन की मदद करते रहेंगे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, गुरुवार को पुतिन ने कहा है, “हमारा उद्देश्य सैन्य संघर्ष को आगे बढ़ाते रहने का नहीं है बल्कि हम इस युद्ध को ख़त्म करना चाहते हैं. ये जिनता ज़ल्दी हो, उतना अच्छा है.”

हालांकि अमेरिका ने कहा है कि संघर्ष ख़त्म करने में रूस की कोई दिलचस्पी नहीं है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा है, “पुतिन ने अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं दिए हैं कि वो बातचीत के लिए तैयार हैं.”

उन्होंने कहा, “इसके विपरीत ज़मीनी स्तर पर वो जो कर रहे हैं और जो हवाई हमले किए जा रहे हैं वो बताते हैं कि वो यूक्रेनी नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा जारी रखना चाहते हैं और युद्ध बढ़ाना चाहते हैं.”

रूस ने यूक्रेन को अमेरिका की ओर से ‘पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम’ सप्लाई करने की घोषणा का जवाब देते हुए कहा है कि रूस इसका कोई तोड़ निकाल लेगा.

पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जो रडार सिस्टम के साथ काम करता है और ऊंचाई पर उड़ने वाले किसी भी तरह के विमान या मिसाइल हमले को इंटरसेप्ट कर उसे नष्ट कर सकता है.

पुतिन ने कहा कि “ये सिस्टम काफ़ी पुराना है और रूस के S-300 सिस्टम से बेहतर काम नहीं करता.”

उन्होंने ये भी कहा कि ‘हर चीज़ का तोड़ निकाला’ जा सकता है. इसके साथ ही पुतिन ने कहा, “जो ये कर रहे हैं इससे कुछ नहीं होगा बस सैन्य संघर्ष और खिंच जाएगा.”

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेंलेंस्की का हाई-प्रोफ़ाइल अमेरिका दौरा गुरुवार को पूरा हो गया.

अमेरिकी मीडिया का कहना है कि ज़ेलेंस्की को अमेरिका में शानदार अभिनंदन मिला और उनके लिए ये दौरा सफ़ल साबित हुआ.

अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि ज़ेलेंस्की के इस दौरे का एक बड़ा हासिल ये है कि उन्हें अमेरिका 1.8 बिलियन की अतिरिक्त सैन्य मदद देगा और साथ ही अमेरिका ने कहा है कि वह यूक्रेन को अपना पेट्रियट डिफेंस सिस्टम देगा.

अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के साथ पूरा सदन ज़ेलेंस्की के सम्मान में खड़ा हो गया.

ज़ेलेंस्की ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों के साझा सेशन को भी संबोधित किया.

उन्होंने कहा, “हमारा देश विपरीत परिस्थितियों में भी मज़बूती से खड़ा रहा है और आने वाला साल युद्ध का टर्निंग प्वाइंट साबित होगा.”

“जिस तरह 1944 के क्रिसमस में बहादुर अमेरिकी सैनिकों ने नाज़ियों से मुक़ाबला किया था, उसी तरह बहादुर यूक्रेनी सैनिक इस बार क्रिसमस में पुतिन की सेना से लड़ते रहेंगे.”

ज़ेलेंस्की के बयान और यूक्रेन के लिए अमेरिका से मिले समर्थन की रूस ने कड़ी निंदा की है. रूस ने कहा है कि अमेरिका अप्रत्यक्ष रूप से ये युद्ध लड़ रहा है.

रूस ने कहा है कि “इस तरह के ‘उकसावे वाले क़दम’ से संघर्ष और बढ़ेगा, जिसके भयंकर परिणाम होंगे. यूक्रेन को पैट्रियट सिस्टम देने का क़दम बेहद परेशान करने वाला है.”

रूस ये भी कहा है कि ज़ेलेंस्की ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान शांति की कोई बात नहीं की है. उनका शांति स्थापित करने का कोई इरादा नहीं है.

रूसी राष्ट्रपति के प्रेस सचिव दमित्रि पेसकोव ने कहा कि “ये इस बात का सबूत है कि अमेरिका रूस के साथ एक प्रॉक्सी युद्ध लड़ रहा है.”

इस दौरे के दौरान बाइडन और ज़ेलेंस्की ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में बाइडन ने कहा कि यूक्रेन के साथ एक वैश्विक गठबंधन बनाने में उसे ‘ज़रा भी संकोच’ नहीं है.

इस चिंता के बावजूद कि अमेरिका के कुछ सहयोगी देश रूस-यूक्रेन युद्ध के जारी रहने से वैश्विक खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति की किल्लत से जूझ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह यूक्रेन को समर्थन देने को लेकर “बहुत अच्छा” महसूस करते हैं और ये समर्थन जारी रहेगा.

इस युद्ध में यूक्रेन के सबसे बड़ा समर्थक और सहयोगी अमेरिका ने पहले ही उसे 50 अरब डॉलर की मानवीय मदद, वित्तीय मदद और सुरक्षा मदद देने की प्रतिबद्धता जताई है. ये यूक्रेन के किसी भी सहयोगी देश की ओर से दी गई मदद से कहीं ज़्यादा है.

पुतिन के नरम पड़ते तेवर

गुरुवार को पुतिन ने कहा है कि वह युद्ध का अंत चाहते हैं और कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए इस दिशा में बढ़ना चाहिए.

पुतिन का ये बयान ऐसे वक्त आया है जब यूक्रेन ने ये कहा है कि वह लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका ने उसका हाथ थामते हुए ये कहा है कि वह इसमें यूक्रेन की मदद करता रहेगा.

इस बार जब ज़ेलेंस्की अमेरिका से अपने देश लौट रहे हैं तो वो अमेरिका से पेट्रियट डिफेंस सिस्टम पाने का वादा लेकर लौट रहे हैं.

लेकिन पुतिन का हालिया बयान उनके कुछ दिन पहले के तेवर से बिलकुल अलग नज़र आता है.

बीते सप्ताह रूस ने कहा था कि युद्ध के दौरान “क्रिसमस सीज़फ़ायर जैसा कुछ भी नहीं होगा.”

दमित्री पेसकोव ने 15 दिसंबर को क्रिसमस सीज़फायर से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था, “इस तरह की बात हमारी बातचीत में सामने नहीं आई है और ना ही ये हमारे एजेंडे में कोई मुद्दा है.”

ज़ेलेंस्की ने रूस से क्रिसमस को नज़र रखते हुए अपनी सेना कम करने को कहा था और इसे शांति वार्ता की दिशा में पहला क़दम बताया था. लेकिन पेसकोव ने इसके जवाब में कहा था कि यूक्रेन के साथ तब तक शांति वार्ता नहीं की जा सकती जब तक ज़ेलेंस्की ‘ज़मीनी हक़ीक़त’ नहीं मान लेते.

इससे पहले अक्टूबर में भी रूस युद्ध के प्रति अपने उत्तेजक रवैये के उलट थोड़ा नरम दिख रहा था.

माना जा रहा था कि रूस के रक्षा मंत्री और अमेरिका के रक्षामंत्री के बीच हुई बातचीत इसकी अहम वजह थी.

रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के साथ पांच महीने के बाद टेलीफ़ोन पर बात की थी.

अलजज़ीरा में इस साल अक्तूबर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रैचेप तैय्यप अर्दोआन ने उस वक्त कहा था कि पुतिन बातचीत को लेकर पहले के मुक़ाबले काफ़ी नरम रवैये में नज़र आ रहे हैं.

इस रिपोर्ट के अनुसार पुतिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने पहले भी पत्रकारों से कहा था कि ‘रूस शुरूआत से ही बातचीत चाहता रहा है’ और उसके रवैये में कुछ भी नहीं बदला है.

अक्टूबर की शुरुआत में, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि रूस युद्ध ख़त्म करने की दिशा में काम करने के लिए अमेरिका या तुर्की के साथ जुड़ने को तैयार है, लेकिन अभी तक बातचीत के लिए कोई गंभीर प्रस्ताव नहीं मिला है.

अब एक बार फिर रूस के तेवर युद्ध को लेकर नरम पड़ रहे हैं लेकिन इस बार अमेरिका और यूक्रेन का रुख़ पहले से कहीं ज़्यादा तीख़ा हो चुका है.

रूस से बचते-बचाते ज़ेलेंस्की बाइडन से मिलने कैसे पहुंचे अमेरिका
रूस यूक्रेन युद्ध शुरू होने के क़रीब 10 महीनों बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की बीते बुधवार पहली बार अमेरिका पहुंचे.

लेकिन ज़ेलेंस्की जिस तरह और जिन हालातों में अमेरिका पहुंचे, वो बताता है कि अमेरिका और यूक्रेन दोनों के लिए उनके आपसी संबंध कितने अहम हैं.

मंगलवार 22 दिसंबर को वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में युद्ध प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रहे थे.

यहां से उन्हें ट्रेन के ज़रिए पोलैंड ले जाया गया जहां अमेरिकी वायु सेना का एक विशेष विमान उन्हें अमेरिका ले जाने के लिए पहले से तैयार था.

इस हफ़्ते की शुरुआत में ही ज़ेलेंस्की के अमेरिका दौरे की ख़बरें आना शुरू हो गयी थीं.

लेकिन उनके दौरे की ख़बरों की पुष्टि बुधवार सुबह उस वक्त हुई जब अमेरिकी अधिकारी इस बात को लेकर आश्वस्त हो गए कि ज़ेलेंस्की सुरक्षित अमेरिका के लिए निकल गए हैं.

ज़ेलेंस्की के संभावित अमेरिकी दौरे पर कई महीनों से चर्चा जारी थी. लेकिन 11 दिसंबर को ज़ेलेंस्की और बाइडन के बीच बातचीत होने के बाद ज़ेलेंस्की के अमेरिकी दौरे को एकाएक अंतिम रूप दिया जाना शुरू हुआ.

इसके तीन दिन बाद ज़ेलेंस्की को अमेरिका आने का न्योता दिया गया. और फिर उनके अमेरिकी आने की तैयारियां शुरू हुईं.

इस दौरे से जुड़ी आधिकारिक सूचना भी जारी नहीं की गई.

अमेरिका में शांति के दौर में भी राष्ट्रपतियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दी जाती है. लेकिन युद्ध के दौर में नेताओं के लिए ख़तरे ज़्यादा होते हैं.

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